धीरे धीरे – राकेश आर्यन

हर रुख से पर्दा हट रहा है अब धीरे धीरे
कहानी में यूँ रंग बदल रहा है अब धीरे धीरे
रिश्ते एहसासों को खरीदा बेचा जाएगा अब यहां
ज़रा ठहरो ये बाज़ार गर्म हो रहा है अब धीरे धीरे
नाम वालों से सीखा था यहां
नाम करने का तरीका
पर नाम वाला ही बदनाम हो रहा है अब धीरे धीरे
लफ़्ज़ों के जाल में फसा है हर कोई यहाँ पर
होश में आओ ज़रा
हर शब्द हथियार बन रहा है अब धीरे धीरे
जो वक़्त थम गया था
यारों की यारी में
वक़्त की खुमारी में
बेकशी में बेकरारी में
वो वक़्त भी चल पड़ा है अब धीरे धीरे …

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 05/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/05/2017
  4. mani mani 05/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 05/05/2017

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