मीठी बोली

बोलो तो मीठा बोलो,
तोल-मोल कर,ह्रदय -तुला पर
सोच-समझ कर मुहं खोलो
बोलो तो मीठा बोलो

कौआ किसका धन हरता?पर,
उसकी कर्कश कावं-कावं
मन निरानंद कर देती है
कोयल किसको क्या देती है?
सबको मीठी कूह-कूह से
सम्मोहित कर लेती है

निम्बोली कड़वी होती है
उसे कोई कब खाता है
मीठा फल है आम
सभी के मन वही सुहाता है
मीठेपन से सभी फलों का
राजा भी कहलाता है

मन के मीठे सब को भाते
कटु से कौन करे व्यवहार
जो है मधुर उसी का साथी
बन जाता है यह संसार

साथ समय के भर जाता है
तीखे शस्त्रों का भी वार
भरती नहीं दिनों-सालों तक
कटु-बोली से पड़ी दरार

मीठी बोली हर लेती है
निर्दय के हृदय को भी
इसी लिए तो बोल बोलते
सदा मधुर ही कवि-कोविद

मीठी-बोली को अपनाओ
मन की सब गांठे खोलो
भेद-भाव को छोड़ सभी के
कानों में मिश्री घोलो
बोलो तो मीठा बोलो

7 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/05/2017
  3. C.M. Sharma babucm 05/05/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/05/2017
  5. mani mani 05/05/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 05/05/2017

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