कभी हम …

।। कभी हम ।।

कभी हम एक थे,
चाहे गरीब थे,
मगर करीब थे ।

मै मन्दिर जाता था,
तुम मस्जिद जाते थे ।
मै गीता पढ़ता था,
तुम कुरान पढ़ते थे ।

कभी लड़ते और झगड़ते थे,
मगर फिर भी साथ रहते थे,
मिलकर हँसते और हँसाते थे ।

अब हम तुम अलग हो गए,
वो बाँटकर हमे चले गए,
हम एक से दो,
दो से तीन हो गए,
फासले कितने गहरे हो गए ।

जब भाई भाई के लहू का,
प्यासा हो गया,
जन्नत का रंग लाल हो गया,
आँतकवाद से तबाह हो गया,
जगत के लिए तो एक नया,
तमाशा हो गया ।

जवान इधर भी मर रहे है,
जवान उधर भी मर रहे है,
नफरत की आग मे क्यों,
हम दोनो जल रहे है ।
क्या यही हमारे नसीब थे ।

कभी हम एक थे …

3 Comments

  1. babucm babucm 04/05/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/05/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2017

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