कविता :– भाईचारा, अमन नैन

 

रह गयी झूठी शानो शोकत

रह गये झूठे वादे

भाई भाई का भेरी हुआ

ना रहा खून का रिश्ता

बूढ्ढो की कदर घट गयी

ना रहा प्यार छोटो का

वो साथ बैठ कर लोगो का

एक दूसरे का सुख दूख

बाँटना ना रहा

धर्म के नाम पर

एक दूसरे को काट रहा

हुआ व्यक्ति मतबली

दूसरो का ना ख्याल रहा

पैसे के नशे मे भूल गया

कदर करनी अपने से छोटे की

अपनो को कर पराया

कुतो को लगाए गले

रह कर शहर मे

खुद को राजा रहा बता

अमन कुछ नही रखा मौह माया मे

दुनिया मे थोडा भाईचारा कमा ले

3 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 03/05/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 03/05/2017
  3. C.M. Sharma babucm 04/05/2017

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