सर काटते रहे — डी के निवातिया

वो हमारे सर काटते रहे
हम उन्हें बस डांटते रहे !!

वो पत्थरो से मारते रहे
हम उन्हें रेवड़ी बाटते रहे !!

लालो की जान जाती रही
हम खुद को ही ठाटते रहे !!

माँ बहने बिलखती रही
नेता जी गांठे साँठते रहे !!

जान  हमारी निकलती रही
हम धैर्य को अपने डाटते रहे !!

राजनीति का खेल यूँ हुआ
वो हमे आपस में बाँटते रहे !!

चलता रहा वार्ता का दौर पे दौर
धर्म दिलो की खाई पाटते रहे  !!
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डी के निवातिया

24 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
      • C.M. Sharma babucm 02/05/2017
        • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/05/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
  5. angel yadav anjali yadav 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
  7. md. juber husain md. juber husain 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
  8. vijaykr811 vijaykr811 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
  9. Shyam Shyam tiwari 02/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/05/2017
  10. mani mani 05/05/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2017

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