*वो मजदूर है।*-मधु तिवारी ( 1 मई मजदूर दिवस पर विशेष)

*वो मजदूर है।*

भुजाओं मे जग अड़ा है
संसार गजब दिख पड़ा है
गगनचुम्बी महल खड़ा है
जो कद मे उससे बड़ा है
वो मजदूर है।

महल मे नित हर्षोल्लास
जहाँ मदिरा की ही प्यास
झोपड़ी है महल के पास
अंदर उसके जीवन उदास
वो मजदूर है।

अति ऊपर हवाई सफर
हस्तियां ही कर पाती जबर
बनाने कसता है जो कमर
संसार मे न उसकी कदर
वो मजदूर है।

हरे भरे खेत लहलहाते
धरतीा से सोना उगलाते
जिसका फल वो कितना पाते
खाली हाथ ही रह जाते
वो मजदूर है।

बहुमूल्य रत्नों की खान
अंधकूप कोयला खदान
जोखिम मे डाल अपनी जान
बढ़ाता है उसका मान
वो मजदूर है।

महत्ता जहाँ क्षितिज की छोर
कर्मरत तु घोर कठोर
दिशा समस्त औ सभी ओर
जिस बिन संध्या न ही भोर
वो मजदूर है।

मधु तिवारी

18 Comments

  1. mani mani 01/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/05/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 01/05/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 01/05/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/05/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 01/05/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 02/05/2017
  7. C.M. Sharma babucm 02/05/2017
  8. Aman Nain Aman Nain 03/05/2017
  9. ashwin1827 ashwin1827 04/05/2017

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