मेरे ख्वाब कभी जो पास तुम्हारे आते- आशीष अवस्थी

मेरे ख्वाब कभी जो पास तुम्हारे आते
चुपके से उनको तुम अपने पास सुलाते

धूप शहर की तेज बहोत थी फिर भी हम बच जाते
गर तुम गगरी में मीठा पानी भर ले आते

होता ऐसा प्रेम पखेरू कभी न उड़ने पाते
गर तुम अपनी छत पर दाना इन्हें चुगाते

कितना अच्छा होता के ये गीत कभी न रोते
कभी समय जो पड़ता तो भाव हँसाने आते

सारी बाधाये जीवन की इक पल में मिट जाती
बस तुम मेरा हाथ पकड़ क़दमों से कदम मिलाते

मेरे ख्वाब कभी जो पास तुम्हारे आते।।

16 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 01/05/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/05/2017
  3. vijaykr811 vijaykr811 01/05/2017
    • Ashish Awasthi Ashish Awasthi 01/05/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 01/05/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/05/2017
  7. angel yadav anjali yadav 02/05/2017

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