प्यार की नाव

प्यार की नाव

चाहत की नदियाँ में
प्यार की नाव को रखा
दिल की कागज़ से बनाया था इसे
अभी भिंगाओ ना इसे

जिंदगी के घेरों से दिल रैन-शबर
साँसों की खुशबू में सजाया था इसे
बस अभी भिंगाओ न इसे

कितने ख़्वाब बुने थे,कितने उम्मीदें थी
अभी तो धारा में लगाया था इसे
अभी तो भिंगाओ न इसे

कागज की नाव थी
उस पर सपनों का महल था
गम की साये से दूर खुशियों का पहल था

अभी तो खुशियों के आँसुओ से सजाया था इसे
अभी तो भिंगाओ ना इसे

चाहत की नदियाँ में
प्यार की नाव को रखा
दिल की कागज़ से बनाया इसे
अभी भिंगाओ न इसे

रचनाकार-मु.जुबेर हुसैन

12 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 30/04/2017
  2. md. juber husain md. juber husain 30/04/2017
  3. C.M. Sharma babucm 01/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 02/05/2017
  4. vijaykr811 vijaykr811 01/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 02/05/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 02/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 02/05/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 02/05/2017

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