मेरे अन्दर का सच- आनन्द

मेरे अन्दर का सच मुझसे है कहता
तू जैसा है वैसा ही क्यों नही रहता
तू मुझसे खफा है या मजबूर है तू
या दुनिया के चक्कर मे मुझसे दूर है तू
जानता हूँ सूरज है सर पर चढ़ा
सब्र रख अभी दोपहर है शाम तक धूप ढल जाएगी
दोस्ती ह्वाओं से करने से क्या फ़ायदा
नर्मी मौसम मुताबिक सुर्ख हो जाएगी
बहने दे इनको तू क्यों है बहका
तू तो विपरीत धार के है बहता
(आनन्द)

9 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 29/04/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 30/04/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/04/2017
  4. mani mani 30/04/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 30/04/2017
  6. babucm babucm 30/04/2017
  7. vijaykr811 vijaykr811 01/05/2017
  8. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2017

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