प्यार की पुकार

तुम डाले डोरा दिल पर कब्ज़ा किये बैठी हो
रातों दिनों न कुछ भिन्न नींदें उड़ाये बैठी हो
हम जान है तुम्हारी तुम जान हो हमारी
महबूब, जान, प्रिय बस तुम ये कहती रहती हो

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 28/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/04/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 28/04/2017
  4. C.M. Sharma babucm 29/04/2017

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