कविता:– पैगाम-ए- सनम आया है, अमन नैन

महकने लगी हवा जब

पैगाम-ए- सनम आया है

बडे चीर बाद उसने

याद हमारी आयी है

हाल मेरा वह

पूछ रही है

यादे वो पुरानी अाज

ताजा कर रही है

बिते दिनो को

मायूसी से बता रही है

दर्द अपने दिल का

धीरे से सुना रही है

दुनिया से छूपाती फिर

नजर हमसे मिला रही है

आँसू मे तस्वीर वो

मेरी बना रही है

दिल की गहराई मे

वह उतार रही है

अमन तेरे नाम से वह

फिर नया संसार बसा रही

6 Comments

    • Aman Nain Aman Nain 02/05/2017
  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2017
    • Aman Nain Aman Nain 02/05/2017
  2. Kajalsoni 28/04/2017
    • Aman Nain Aman Nain 02/05/2017

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