रूह- आनन्द कुमार

रूह का एक हिस्सा ख़ाली है
मैंने खामखाँ बेचैनियाँ पाली है
ज़िस्म तो चलता है मीलों रोज़
ऐ दिल बस तेरा क़िस्सा सवाली है
(आनन्द)

6 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 26/04/2017
  2. सीमा वर्मा सीमा वर्मा 26/04/2017
  3. C.M. Sharma babucm 26/04/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/04/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/04/2017

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