ऐ नारी कमजोर नही तू

ऐ नारी कमजोर नही तू क्यो डरी सहमी सी हैं
आखो मे बेबसी का नजारा क्यो पल्को मे नमी सी हैं
मैं मानता हू सेहना परता हैं घर गिरहस्ती खिलाना है मुश्किल
पर सिर्फ सहन तेरे हिस्से क्यो पुरषो का अंश है क्यो धूमिल
सब भूल गए तो याद दिला दे तू टैरीसा है बेदी भी हैं
ऐ नारी …….

मौताज नही सम्मान की तू उसने जननी बना तुझे बक्सी हैं
छोर साथ का आस किसीका तू अकेली भी चल सकती हैं
अपनो ने किया धोखा तुझसे देने मे शिक्छा दिक्छा का दान
होता समानता सुरू से तो समाज न होता पुरूष प्रधान
बांध हैसला दिखा दे तू सब कुछ सम्भव कर सकती हैं
ऐ नारी……….

जिसने भी किया अपमान तेरा चीर हरण मे हाथ रहा
सिर्फ अन्त हुआ सिर्फ अन्त हुआ करते है सारे ग्रन्थ ब्या
पर तुझको ईन्साफ की खातिर आवाज तो उठानी होगी
द्रोपती के प्रतिग्या को फिर से दोहानी होगी
हार कर चुप रहने से अपमानि हैं तू तेरी जाती भी हैं
ऐ नारी…………

14 Comments

    • arun kumar jha arun kumar jha 26/04/2017
  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/04/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 27/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/04/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 27/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 26/04/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 27/04/2017
  4. C.M. Sharma babucm 26/04/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 27/04/2017
  5. chandramohan kisku chandramohan kisku 26/04/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 27/04/2017
  6. Kajalsoni 27/04/2017
    • arun kumar jha arun kumar jha 27/04/2017

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