गजल – एक चिड़िया आ गयी है जिंदगी की डाल पर (मनुराज वार्ष्णेय)

एक चिड़िया आ गयी है जिंदगी की डाल पर
दिल मेरा भी बैठा है अपने हठ की हड़ताल पर

हल किये लाखों मुक़दमे और दुनिया के भरम
कैसा प्रश्नचिह्न लग गया है ज़िन्दगी के सवाल पर

मस्त थे अपनी ही धुन में न थी कोई बंदिशे
खो दिए वो सारे मौके महबूब की एक चाल पर

हम शिकारी थे बड़े पर भूल कैसी कर गए
चुग लिए खुद जाके दाने जो पड़े थे जाल पर

महफूज थे जो ज़िन्दगी में महफूज अब हम न रहे
कल हम रहे या न रहे है क्या है भरोसा काल पर

ज़िन्दगी थी जंदगी अब जिंदगी में न रही
छोड़ दे तू हमको यूँ जी लेंगे अपने हाल पर

14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/04/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 25/04/2017
  3. babucm babucm 25/04/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 25/04/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/04/2017
  6. Kajalsoni 27/04/2017

Leave a Reply