ग़ज़ल-मिलो उस ही गली में तुम कभी फिर से सनम हम को….मनिंदर सिंह “मनी”

मिलो उस ही गली में तुम कभी फिर से सनम हम को |
जहाँ पाया था हमने इश्क में महकी सी शबनम को ||

कहीं हमने कभी तुमने तराना छेड़ा था दिल का |
सही जाये न मुझ से दूरी तरसू मैं उसी दम को ||

कदम पड़ते ही गलियों में बजे पायल की तेरी छम छम |
सनम तुम लौट कर छेड़ो वही मीठी सी सरगम को ||

वफाये हार कर किस्मत से अश्को में लगे डूबी |
न रोये दिल बहाये आँख भी न अब जमी नम को ||

जुदाई है लिखी किस्मत में फिर भी चाह तेरी ही |
न होने दूंगा दिलबर दूर दिल से अब “मनी” तुम को ||

मनिंदर सिंह “मनी”

12 Comments

  1. angel yadav anjali yadav 24/04/2017
    • mani mani 24/04/2017
  2. babucm babucm 24/04/2017
    • mani mani 24/04/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/04/2017
  4. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 24/04/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/04/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/04/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/04/2017
  8. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/04/2017
  9. Kajalsoni 27/04/2017

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