आज भी

मेरी नयी रचना

शीर्षक- आज भी

आज भी
जब याद मैं तुझे करता हूँ
मेरी आँखे छलक जाती हैं
सोये अरमां जाग जाते हैं
मेरे जज्बात बहक जाते है
दिल में दबी तेरी तस्वीर देखकर
मेरी साँसे ठहर जाती हैं
वो गलियों में बिताये लम्हे
वो बाहों का घेरा
मेरी साँसों पे तेरा डेरा
याद बहुत आते हैं
आज भी
उन गलियों का सूनापन
मुझे कचोटता रहता है
जीवन के अधूरे हिस्सों को
भरने में डर लगता है
जीवन के उन अधूरे किस्सों में
गुमराह होने का डर लगता है
आज भी
तू जिन्दा है मुझमे
कहने से दिल डरता है—अभिषेक राजहंस

8 Comments

  1. babucm babucm 23/04/2017
    • Abhishek Rajhans 26/04/2017
    • Abhishek Rajhans 26/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/04/2017
    • Abhishek Rajhans 26/04/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/04/2017
    • Abhishek Rajhans 26/04/2017

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