टिमटिमाता हुआ, एक चिराग़ … Raquim Ali

अगर,
घनघोर घटा छाई हो
आंधियां चल रही हों
बारिश मूसलाधार हो;

अगर,
अमावस की रात हो
हर सिम्त में फैला हुआ
बेइंतहा अंधकार हो।

अगर,
मेरे हाथ में सिर्फ़
टिमटिमाता हुआ, एक चिराग़ हो
मेरे ख़ुद के सहारे के लिए;

या रब,
जलाए रखूं
बचाए रखूं, उसको मैं
जमाने भर के, उजाले के लिए।

… र.अ. bsnl

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/04/2017
  3. raquimali raquimali 22/04/2017
  4. babucm babucm 22/04/2017
  5. raquimali raquimali 22/04/2017
  6. Kajalsoni 22/04/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/04/2017
  8. raquimali raquimali 24/04/2017

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