दिल करता है……………. कर देता हूँ |गीत| “मनोज कुमार”

मैं और मेरी कलम……………..

दिल करता है जब जब में,लिख देता हूँ |
मैं अपनी कलम से अपना, दर्द बयाँ कर देता हूँ ||

मैं और मेरी कलम हम दोनों, एक दूजे के साथी है |
इसके बिना अधूरा हूँ मैं, मेरे बिना ये आधी है ||
तीखी हों या मीठी बातें, सब कुछ साफ कह देता हूँ |
दिखे आइना जैसा सब कुछ, अपनी कलम से कहता हूँ ||

दिल करता है जब जब में, लिख देता हूँ |
मैं अपनी कलम से अपना, दर्द बयाँ कर देता हूँ ||

इससे वफा में करता हूँ, बहुत जबरदस्त ये लिखती है |
सपनों को साकार करे ये, मन प्रफुल्लित करती है ||
नन्ही कलम हूँ छोटी सी, पूजा इसकी करता रहूँ |
दिल छू ले ऐसी बातें, और प्रेम गीत रचता रहूँ ||

दिल करता है जब जब में, लिख देता हूँ |
मैं अपनी कलम से अपना, दर्द बयाँ कर देता हूँ ||

बिना कलम के वीणापाणी, मैं तो जी सकता नही |
रुके कलम ना मेरी माँ, शारदे विनती करता यही ||
सरस सरल और मीठा सा, ताना बाना बुनता रहूँ |
करता है “मनोज” कामना, प्यारा सा लिखता रहूँ ||

दिल करता है जब जब में, लिख देता हूँ |
मैं अपनी कलम से अपना, दर्द बयाँ कर देता हूँ ||

( मनोज कुमार )

4 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 20/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/04/2017
  3. Kajalsoni 22/04/2017

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