वो तरसती नजर

दुनिया की भीड़ में ,
चली जा रही थी ,
लोगो के बीच में ,
खो सी गयी थी.
ठहर से गए मेरे कदम,
वो नजारा देख कर ,
एक नजर देख रही थी ,
मुझे मायूस हो कर.
मै थी अजनबी उसके लिए ,
था वो दर्द भरा पल मेरे लिए .
हजारो सवाल थे ,
उसकी तरसती निगाहों में ,
जैसे ढूढ़ रहा हो मेरी आँखों में .
मै आज भूखा क्यों हूँ,
मै रोज भटकता क्यों हूँ. ?
क्या कभी मेरी भूख मिट पायेगी ,
क्या कभी मेरी माँ मुझे ,
पेट भर रोटी दे पायेगी ..
वो इतना मजबूर क्यों रहती है ,
मेरे लिए वो उदास क्यों रहती है .
मै ख़ामोशी से उसे देख रही थी ,
उससे नज़ारे मिलाने की कोशिश कर रही थी .
मै उस नजर से,
नजर न मिला पायी ,
मै उसके सवालों के,
जवाब न दे पायी …..
अचानक उसके चेहरे पर ,
एक मुस्कान आ गयी ,
उसकी नजर एक तरफ मुड़ गयी..
जहाँ से उसकी माँ ,उसको निहार रही थी ,
हाथ में लिए रोटी को,
आँचल से पोछ रही थी .
उसकी नजरे यूं चहक सी गयी ,
उसके उछलते कदमो की तस्वीर ,
मेरी आँखों में रह गयी ..
हमेशा के लिए ….आँखों में रह गयी ………..

                                                                                     अंजली यादव 

                                                                                        kgmu (lko)

9 Comments

  1. shivdutt 18/04/2017
    • angel yadav angel yadav 18/04/2017
  2. mani mani 18/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/04/2017
  4. babucm babucm 18/04/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/04/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/04/2017
  7. Kajalsoni 22/04/2017

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