मेरा नाम पुकार रहे तुम

मेरा नाम पुकार रहे तुम,
अपना नाम छिपाने को !

सहज-सजा मैं साज तुम्हारा-
दर्द बजा, जब भी झनकारा

पुरस्कार देते हो मुझको,
अपना काम छिपाने का !

मैं जब-जब जिस पथ पर चलता,
दीप तुम्हारा दिखता जलता,

मेरी राह दिखा देते तुम,
अपना धाम छिपाने को !

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