ज़माना कहता है – शिशिर मधुकर

तुम्हे देखा है सुबह शाम ज़माना कहता है
तेरी खातिर हुआ बदनाम ज़माना कहता है

बड़ा काबिल था मैं एक दिन सबकी निगाहों में
मगर मुझको नहीं अब काम ज़माना कहता है

मुझे पहले किसी ने ना कभी बेचैन देखा था
अब तो आता नहीं आराम ज़माना कहता है

महफ़िलें खूब सजती थी मगर हाला ना पीते थे
अब तो हाथों में है बस जाम ज़माना कहता है

कभी रोका ना गैरों को और हँस के मिले सबसे
ये ही तो असली है इल्ज़ाम ज़माना कहता है

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/04/2017
  2. Anjali yadav 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/04/2017
  4. C.M. Sharma babucm 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/04/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/04/2017
  6. Kajalsoni 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/04/2017

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