गरीबों में गरीब

मुक्तक — गरीबों में गरीब

माना कि तू गरीबों की बस्ती में पला था

इक हताश-सी जिन्दगी भी जिये जा रहा था।

पर किसका कफन चुराने तू आगे बढ़ा था

वो गरीबों में गरीब था] बेकफन चला था।

——–  भूपेन्द्र कुमार दवे

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5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2017
  2. babucm babucm 17/04/2017
  3. Kajalsoni 17/04/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/04/2017

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