तुम

सूरज की पहली धौस सी तुम
फूलो की मखमली ओस सी तुम
पहली नज़र का प्यार हुआ
जब बिन पिए मदहोश थी तुम…..

सुगंध सी उर में बस गयी तुम
नश्तर सी दिल में धस गयी तुम
नैनों के तीखे तीर लिए
वो दो धारी तलवार थी तुम…..

ख्वाबो की मानों परी सी तुम
आँखों में सपने भरी सी तुम
साँसे जैसे इस जीवन की
मेरी ऐसी दरकार थी तुम…..

पाकर मुझको इतरायी सी तुम
प्यार में मेरे इठलाई सी तुम
जज़्बातों को करके काबू
मेरे लिए बेक़रार थी तुम……

वो पहली मुलाकात पे घबराई सी तुम
आकर बाँहों में कसमसाई सी तुम
कुदरत ने जिसको लिखा था
वो मेरे कल की तक़दीर थी तुम…..

जारी……….

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2017
  2. babucm babucm 17/04/2017
  3. Kajalsoni 17/04/2017
  4. mani mani 17/04/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/04/2017
  6. RaviBhattacharya RaviBhattacharya 17/04/2017

Leave a Reply