हम जीना सीखे – अनु महेश्वरी

पहले मैं भी,
बहुत शिकायतें करती थी,
उलझने छोटी हो, या हो बड़ी,
हमेशा उन्हें सुलझाने की,
कोशिश करती रहती थी,
उन्ही बातों को सोचती रहती थी,
न सुलझने तक परेशान रहती थी,
पर अब मैंने जीना सिख लिया है,
हाँ, अब मैंने जीना सिख लिया है|

मैं, उलझनों को, अब भी,
करती हु कोशिश, सुलझाने की,
पर अब उसमे, खो नहीं जाती,
जो मेरे बस में है, उतना करती हूँ
जो प्रयास के बाद भी नहीं सुलझती,
उसे ईश्वर पे, छोड़ देती हूँ,
जिससे ज़िन्दगी थोड़ी आसान बनी रहती है,
हाँ, अब मैंने जीना सिख लिया है,
हाँ, अब मैंने जीना सिख लिया है|

कुछ उलझने अपनी, छोड़े ईश्वर के हाथ,
उलझने दी है अगर, तो सुलझायेंगे भी नाथ,
सोच सोच के हमेशा, उन्ही मुश्किल बातों को,
हम हठ में अपनी, कठिन न बनाए ज़िन्दगी को,
शांति के लिए, हम माफ़ी मांगना सीखे,
सुकून के लिए, हम माफ़ करना भी सीखे|
कुछ बातें ईश्वर के हाथो छोड़,
अब हम जीना सीखे,
हाँ हम जीना सीखे|

 
अनु महेश्वरी
चेन्नई

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/04/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 16/04/2017
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  6. C.M. Sharma babucm 17/04/2017
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  7. raquimali raquimali 17/04/2017
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  9. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/04/2017
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