मैं दीप जला के रखती हूँ

मैं दीप जला के रखती हूँ
रातों मे तुम कब आ जाओ

मैं फूल बिछा के रखती हूँ
जाने किस मोड़ से आ जाओ

जाने कैसे मेरी रात कटी
बिस्तर की सिलवट से पूछो
रोए हम रातों मे कितना
मेरी आँखो की लाली से पूछो

बेचैनी बढ़ती है दिल की
जब याद तेरी आ जाती है
आंशू खुद ही बह उठते
आँखो मे नमी सी छा जाती है

बर्दाश्त नही अब ये दूरी
प्रियवर “कृष्णा” तुम आ जाओ
दर्शन को तरसे तेरी राधा
अब दिल की प्यास बुझा जाओ

   ” कृष्णा चतुर्वेदी “

 

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2017
    • Krishna Chaturvedi 16/04/2017
  2. Kajalsoni 16/04/2017
    • Krishna Chaturvedi 16/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/04/2017
  4. Krishna Chaturvedi 16/04/2017
  5. babucm babucm 17/04/2017
  6. mani mani 17/04/2017
  7. Durgesh m tiwari 01/05/2017
  8. Mangled pandey 13/05/2017

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