कहाँ हो तुम – राकेश आर्यन

मेरे ख्यालों का गुलिस्तां वीरान है कब से,
कहाँ हो तुम
धूप धूप है ये जिंदगी मेरी
नही छुपा बादलों में आसमां कब से,
कहाँ हो तुम
लौट आओ किसी रोज़ की कोई सहर हो ऐसा
नही मिला मुझको तुझसा आसना कब से,
कहाँ हो तुम ।।

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  1. C.M. Sharma babucm 17/04/2017

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