ऐ दुशमन तेरी भूल हैं

ऐ दुशमन तेरी भूल है हो सकती हममे फूट हैं
पलते हैं कई धर्म यहा हर धर्म के अपने रूल हैं
हर किसी के जीवन यापन के नीयम भी अलग जरूर हैं
पर सभी के खून मे देश प्रेम भरपूर हैं
एे दुश्मन………….
याद नही तुझको की हमने खदेर के कैसे भगाया था
भूल के अपनी जाती धर्म सभी ने फर्ज निभाया था
खाली हिन्दू मुश्लिम नही सभी धर्म के जवान सरीक थे
तुझको धूल चटाने मे सभी धर्म के वीर थे
ऐ दुश्मन……….
देख खेल मैदान मे खेलते सभी संग है
कोइ जात धर्म नही सभी पे वतन का रंग हैं
बल्लेवाजो के एक शॉट पर पूरा वतन जशऩ मनाता हैं
हो जाए जो आऊट तो हर आख नम हो जाता हैं
ऐसे मे कौन कह सकता है मेरा भारत नही अखण्ड हैं
ऐ दुश्मन .………
स्कूल कालेज अस्पताल मे क्या हर छेत्र मे हम सब साथ है
छोर दे अपनी कोशिश तू तेरी हर कोशिस बेकार है
फिल्मो की दुनिया है मिशाल सब साथ रौल निभाते है
जावेद जी के गानो को सोनू निगम जी गाते है
देख पीर दरगाह मे हिन्दू मुश्लिम सब साथ है
जहॉ प्रेम बसा हर दिल वहा तेरी क्या ओकाद है
ऐ दुश्मन…………..

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