उनको मनाइये – शिशिर मधुकर

रूठे हुए जनाब हैं उनको मनाइये
टूटे हुए से ख्वाब हैं उनको मनाइये

ऐसी ना कोई बात है इतने खफा हैं वो
आँखों में आफताब है उनको मनाइये

सज धज के वो आते रहे नाराज़ ना थे जब
बिखरा हुआ शबाब है उनको मनाइये

कोशिश हमारी ख़ाक हुई उनको हॅंसाने में
ये कैसा इंकलाब है उनको मनाइये

उनके बिना तो सांस भी ना आएगी हमको
ना इसका कोई जबाब है उनको मनाइये

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 15/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2017
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 15/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2017
  4. Kajalsoni 16/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2017
  5. C.M. Sharma babucm 17/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/04/2017

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