“मेरे दिल को क्यों तोड़ दी ?”

मेरा चेहरा न देखने की कसम खायी थी,
क्या अख़बारों को पढ़ना छोड़ दी ?
जब जानती थी हर जगह मिलूँगा तुझसे,
तो फिर मेरे दिल को क्यों तोड़ दी ?

युवा कवि “सत्यम श्रीवास्तव”
नैनी, इलाहाबाद। 💯✔

5 Comments

  1. babucm babucm 14/04/2017
    • Writer Satyam Srivastava Writer Satyam Srivastava 14/04/2017
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 14/04/2017
    • Writer Satyam Srivastava Writer Satyam Srivastava 14/04/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 15/04/2017

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