फिर जीते हैं

चलो डीने के पथ पर

फिर से चलते हैं,

बिखरे तिनकों को

फिर से लगाते हैं,

सांस तो छूट रही है

पर फिर नई आस लाते हैं,

खत्म तो कल कर ही दिया था

पर फिर नई शुरूआत करते हैं,

पुस्तक के जिल्द को कल नोच डाला था

चलो आज फिर नया लगाते हैं,

कल जिस प्याले को फोड़ डाला था

चलो आज नया ले कर आते हैं,

जो कपड़े आँसुओ से भीग ग़ये थे

धूप मे उन्हें चलो आज सुखाते हैं,

जो मन डरावने सपने से जाग गया था

चलो नये सपने दिखाकर उसे फिर सुलाते हैं,

चलो फिर से जीते हैं!

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 14/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/04/2017
  3. Kajalsoni 14/04/2017

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