आज का सूरज …

।। आज का सूरज ।।

आज का सूरज,
फिर ढल गया ।
अपना काम कर,
वो आगे निकल गया ।

कुछ देर रूक कर,
चाँद भी छल गया ।
बादलो मे छुप कर,
वो आगे निकल गया ।

हर रात ख्वाब नए,
देकर चली गई ।
उम्मीद जैसे कोई,
रोशन करती गई ।
वक्त आगे निकल गया ।

जब होश आया,
तब हमने पाया,
कल बदल गया,
आज आगे निकल गया ।

आज का सूरज,
फिर ढल गया ।

#ashwin1827

10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 14/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/04/2017
  4. Kajalsoni 14/04/2017

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