उम्र के आईने में… Raquim Ali

वह सोचता है-
‘मैं खूबसूरत हूँ
जवान हूँ,
महान हूँ’;

वह सोचती है-
‘मैं बेहतरीन हूँ
हसीन हूँ
नाज़नीन हूँ ‘।

*

**

***

जब,
उम्र के आईने में, वे झांकते हैं
निकल पड़ती है, उफ़ लबों से-

‘ ओह
यह भरम तो नहीं;
ओह
यह भरम तो नहीं!’

— रक़ीम अली bsnl.

9 Comments

  1. babucm babucm 13/04/2017
  2. raquimali raquimali 13/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/04/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2017
  5. Kajalsoni 14/04/2017
  6. mani mani 15/04/2017
  7. raquimali raquimali 17/04/2017
  8. raquimali raquimali 17/04/2017

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