हथियार चुनो

हम हैं सबल फिर भी दुश्मन ललकार रहा
वो जानता हमे शान्ति प्रियता ने बांध रखा
पर कब तक अब तो मन की ललकार सुनो
शांति विजय को आ गया समय हथियार चुनो

छुप छुप कर वार करे दुश्मन हुन्कार भरे
कब तक भारत मॉं के शीने पर वार सहे
हम हैं सबल खोलो बंधन आर पार करो
शान्ति विजय को आ गया समय हथियार चुनो

दुश्मन को जो आए समझ वो बोल सहि
लोहे को काटने का विकल्प है लोहा ही
कब तक वीर सरहद पर होते रहेंगे शहीद
कब तक वतन मे होंगे अपने मातम और चीख
अब तो दुश्मन के घर को शमशान करो
शांति विजय को आ गया समय हथियार चुनो

भीगी पल्के आंचल ममता की घवाहिल हैं
बापू के आखों मे दर्द की गहरी परछाई हैं
नई दुल्हन की सूनी मांग कैसे देखू
जी करता आज अभि मै रण को कूच करू
दिल के शोले अब रूके नही शंखनाद करो
शान्ति विजय को आ गया समय हथियार चुनो

7 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/04/2017
  2. babucm babucm 12/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/04/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/04/2017
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/04/2017
  6. Kajalsoni 14/04/2017
  7. mani mani 15/04/2017

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