औपचारिकता – अनु महेश्वरी

पुराने दिनों की जब याद आती है,
खुद को कही खोया सा पाती मै|
कितना अपनापन था हर रिश्ते में,
अपनों के बीच या आसपड़ोस में|
हर बात में एक गहराई सी होती थी,
हर साम एक महफ़िल सी होती थी|
कहा खो दिए हमने वह दिन सारे,
कैसे खो दिए हमने वह रिश्ते सारे?
धीरे धीरे सब कुछ धुंधला से गए,
गांव क्या छूटा रिश्ते भी छूट गए|
हम भी अब शहर में रच बस गए है,
अब सब कुछ बदला बदला सा है|
हमने भी शहर के कायदे सिख लिए,
मन को मार, सब कुछ अपना लिए|
आज हम भी औपचारिकता निभाते है,
किसी के घर जाना हो, पहले पूछते है|
पहले की तरह बिना खबर किए ही,
नहीं पहुंच जाते हम किसी के घर भी|
अब तो फ़ोन पे भी बात करनी हो तो,
पहले पूछते है आप व्यस्त तो नहीं हो?
पहले रिस्तो में एक कशिश होती थी,
होता था एक प्यार भरा अपनापन भी|
वह रिश्ते आजकल कही खो से गए है,
सब कुछ अब औपचारिक से हो गए है|

 

अनु महेश्वरी
चेन्नई

20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  4. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  5. Kajalsoni 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  6. shrija kumari shrija kumari 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  7. C.M. Sharma babucm 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/04/2017
  8. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/04/2017
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  9. mani mani 15/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 15/04/2017

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