यमुना A Poem by Alok Upadhyay

नीले आकाश की तरह हुआ करता था जो पानी

आज उसका रंग काला हैं …,

एक जमाने में वो यमुना नदी हुआ करती थी

आज जो गंदा नाला है !

छूकर जाती थी हवा जो लहरें ,

दिया करते थे हँस जहाँ पहरे ,

जिसने प्यासी दिल्ली को अकेले सँभाला हैं ,

एक जमाने में वो यमुना नदी हुआ करती थी

आज जो गंदा नाला है !

एक सूंदर नदी जो नाला बन गई

उस नाले का कारण हम हैं ,

अच्छे नही होते पर्यावरण के लिए इंसान

इसका एक उदाहरण हम हैं ,

कर्ज़ कैसे चुकाएँगे माँ

तूने हमें जो पाला हैं ,

एक जमाने में तूं यमुना नदी हुआ करती थी

आज तूं गंदा नाला है !

Popular Poet Alok Upadhyay With T.Veeru

Popular Poet Alok Upadhyay With T.Veeru

8 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/04/2017
  3. babucm babucm 12/04/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/04/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/04/2017
  6. Kajalsoni 14/04/2017
  7. mani mani 15/04/2017

Leave a Reply