रंग ज़िन्दगी के – राकेश आर्यन

Every person in this universe has four different stages of their life, where they start the journey starting from the God gifted color (Original personality) to the color they create by adding some experiences in the prev. one.
I hope my poem will depict the same as everyone feel in their life. 🙂

नया हूँ अभी नई सी हवा साथ लाऊँगा
रहने दो दो पल के लिए तुम्हरे ही रंग में रंग जाऊंगा
कहो तो दिन को रात और हर रात शाम कह जाऊंगा
न रोऊंगा ना कोसूंगा
जिस रंग में ढालो ढल जाऊंगा
ना उम्मीदों की झड़ी बांधकर आया हूँ
न ले जाने को गठरी कोई लाया हूँ
तुमसे ही हूँ मैं तुम में ही मिल जाऊँगा
🙂
अब भी मैं तेरे रंग में हूँ
जिस दरिया में तू मुझे छोड़ आया
बहता उसी के तरंग में हूँ
धूप छाँव का खेल खेलकर
औरों को मैं देख देखकर
लगता है मैं किसी जंग में हूँ
पर अब भी मैं तेरे रंग में हूँ
🙂
रंगों के इस फेर बदल में
कहीं मैं भी न छोड़ दूँ रंग तेरा
या रंगों पे दूजा रंग चढ़ा
कहीं खो न दूँ वो रंग मेरा
उम्र जो बढ़ती जाती है
हर रंग बदरंग हो जाती है
क्या फर्क पड़ता है कौन सा रंग चढ़ा
सीने में दबा है वो रंग तेरा
🙁
उम्र की आखिरी दहलीज पर खड़ा हूँ
जो तुम चाहो अब मुझको वो सज़ा दो
रंग की वफादारी का मुझको अब वो वफ़ा दो
फिर से मुझपे मेरा रंग चढ़ा दो
हो सके तो वो बचपन लौटा दो
हो सके तो वो बचपन लौटा दो

6 Comments

  1. babucm babucm 12/04/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/04/2017

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