तेरा ईनाम – शिशिर मधुकर

आज फिर से इक सुबह की ढलती शाम हुई
दीप श्रद्धा के बुझ गए सारे पूजा बदनाम हुई

मेरे आँगन के पेड़ों ने ही तो मुझे धोखा दिया
छाँव पड़ती ना थी मुझ पर जब भी घाम हुई

मेरी हस्ती को मिटा पाना तो सम्भव ना हुआ
कहने को दुनिया में ऐसी कोशिशें तमाम हुई

आज अपने घराने पर वो नाज़ इतना हैं करें
नज़र आए ना कहीं इज्जत जब नीलाम हुई

सही गलत के फैसलें भीड़ में अब कौन करे
हर इक शै यहाँ बस एक वक्त की गुलाम हुई

गिरतों को उठाने से कुछ भी हासिल ना हुआ
एक ज़लालत ही बस मधुकर तेरा इनाम हुई

शिशिर मधुकर

20 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  2. babucm babucm 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  4. mani mani 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  7. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  8. Anjali yadav 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2017
  9. Kajalsoni 12/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/04/2017

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