तुम्हारे मिलकर जाने के बाद…(डॉ. विवेक कुमार )

क्या रहस्य है यह
आखिर क्यों हो जाता है
बेमानी और नागफनी-सा दिन
तुम्हारे मिलकर जाने के बाद…

क्यों हो जाती है उदास मेरी
तरह घर की दीवारें-सोफा
मेज पर धरी गिलास-तश्तरियाँ
और हंसता-बतियाता पूरा का पूरा घर…

क्यों डरने लगते हैं हम मन ही मन मौत से तुम्हारे मिलकर जाने के बाद…

क्यों हमारी पूरी दुनिया और खुशियाँ
सिमटकर समा जाती है तुम्हारे होठों की मुस्कुराहटों में
तुम्हारे मिलकर जाने के बाद…

क्यों घंटो हँसता और बोलता बतियाता
रह जाता हँ मैं तुमसे
तुम्हारे जाने के घंटों बाद भी…

क्यों महसूसने लगता हूँ मैं
एक अजीब-सी रिक्तता और व्याकुलता
तमाम सुख सुविधाओं के होते हुए भी
तुम्हारे जाने के बाद…

क्यों बार-बार तुम्हारी ही पहलू में
लौट जाने को मचलता है मन
सागर की लहरों की तरह…

क्यों उलझा रहने को करता है मन
तुम्हारे ही ख्यालों विचारों में दिन-रात
माला में धागा की तरह तुम्हारे मिल कर जाने के बाद…

तेली पाड़ा मार्ग, दुमका, झारखंड।

28 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 12/04/2017
  2. babucm babucm 12/04/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/04/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/04/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/04/2017
  6. mani mani 12/04/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/04/2017
  8. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  9. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  10. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  11. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  12. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  13. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  14. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  15. Awadhesh 12/04/2017
  16. vikram 12/04/2017
  17. poonamshree 12/04/2017
  18. poonamshree 12/04/2017
  19. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  20. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  21. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  22. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  23. Dr.Anand Dr.Anand 12/04/2017
  24. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/04/2017
  25. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 13/04/2017
  26. Dushyant 14/04/2017
  27. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 14/04/2017

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