Do ajanabee

दो अजनबी एक रास्ते पर टकराए थे
थे एक दूसरे से अनजान वो
एक दूसरे की झलक दिल मे बसाये थे
चले थे अपनी ही धुन में वो
क्या पता था मंजिल दोनों को एक ही मोड़ पर लायेगी
कुछ इशारा था उसका ये दोनों को समझायेगी
चलते चलते बस मुस्कराये
मुड़ गए अपनी अपनी राहों पर
बिना सोचे क्या पता ये रास्ते फिर कब टकरायेन्गे
फिर कब हम दोनों को एक दूसरे के करीब लायेंगें
वक़्त का इशारा कुछ ऐसा हुआ
अजनबी बार बार टकराने लगे
एक दुजे को देखकर मुस्कुराने लगे
अब अजनबी उन्ही राहों पर बार बार आते थे
एक दूसरे के इंतजार में घंटों बिताते थे
इतीफाको का सिलसिला शुरू हुआ
मुलाकातो मे तब्दिल हुआ
मिलते मिलते दो अजनबी इतने करीब आये थे
कब वो अजनबी से अच्छे दोस्त बने
ये वो खुद भी ना जान पाये थे

बरखा रानी

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 11/04/2017
  3. Kajalsoni 11/04/2017
  4. mani mani 12/04/2017

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