ससुराल की गली

खोया बचपन, खोयी जवानी
अब मै हुई बड़ी, लो
आई ससुराल जाने की बारी
ससुराल मुझे जाना है
कितने ही सपनो को सजाना है
अपनी ख्वाइशो को, अपने अरमानो को
मुट्ठी मे बन्द कर जाना है
छुट्टे रिश्ते, छुट्टे नाते
अब आ गया पैगाम ,लो
आई पिया की गली जाने की बारी
पिया की गली मुझे जाना है
सब रिश्ते नातो को यहीं भुलकर
उनके रिश्तो से जुड़ जाना हैं
वो बचपन की गलियो को छोड़ कर
ससुराल की गली में छुप जाना है
छोड़ा आंगन, छोड़ा बचपन
लो आई अब उनके आंगन कि बारी
आ गया पैगाम ,लो
आई ससुराल जाने की बारी
उनके घर मुझे जाना है
उनके आंगन की तुलसी बन जाना है
अपने घर को भुलकर
उनके घर का हो जाना है
छुटा वो प्यार, वो दुलार
अब आई जिम्मेवारी उठाने की बारी
अब हो गई मै बड़ी
आई ससुराल जाने की बारी

बरखा रानी

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/04/2017
  3. shrija kumari shrija kumari 10/04/2017
  4. barkhar7 barkhar7 10/04/2017
  5. vijaykr811 vijaykr811 10/04/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/04/2017
  7. C.M. Sharma babucm 11/04/2017
  8. Kajalsoni 11/04/2017
  9. mani mani 12/04/2017

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