पल नहीं लगता….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

ता उम्र लगा रहा दिल अपना बनाने को
तुम क्या आये पल लगा इसे बदल जाने को….

तिनका तिनका जोड़ आशियाँ था बनाया उसने…
सरफिरों की पलक न झपकी उसको जलाने को…

मकान नया सब सामान नया बन गया चाह से…
दिल कहाँ से लाओगे मकान घर बनाने को….

चाह की सीमा न हो तो धूप की आदत डालो….
पल नहीं लगता वक़्त को पर जलाने को….

गरूर इतना की हाथी भी चींटी नज़र आये है….
रखी हैं किताबें खड़हरों का इतिहास बताने को…

ज़मीं काली देख आसमान लाल हो गया….
देखें बचता है कौन नया इतिहास लिखाने को…

‘चन्दर’ तेरी उम्मीद तेरा इख्तियार सब खत्म हुआ….
लो आ गए काँधे भी तुझे सफर पे ले जाने को….
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

24 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  3. Kajalsoni 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  4. Naveen Kumar 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  5. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  8. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  9. barkhar7 barkhar7 10/04/2017
    • babucm babucm 11/04/2017
  10. bhupendradave 11/04/2017
    • babucm babucm 12/04/2017
  11. mani mani 12/04/2017
    • babucm babucm 12/04/2017

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