अकबर-प्रताप संवाद – 1 – अजय कुमार मल्लाह

अकबर –
मृग के जैसी मौत मिले, जब सिंह से लड़े सियार,
हम हैं ख़ुद राजाओं के राजा, तुम हो राजकुमार।

प्रताप –
अभी तो जंग शुरू हुई है, बंद करो बात विचार,
मै तो हूँ माटी का लाल, करूँ मातृभूमि से प्यार।

अकबर –
चूर करूँगा अहम तुम्हारा, मै भी हूँ तैय्यार,
है मेरी भी शमशीर में ताकत, है इसमें भी धार।

प्रताप –
ऐसा बैरी नहीं बना, जो सहेगा इसका वार,
रक्त की धारा मांग रही है, मेरी भी तलवार।

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/04/2017
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/04/2017
  4. Kajalsoni 09/04/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/04/2017
  6. C.M. Sharma babucm 10/04/2017
  7. mani mani 10/04/2017
  8. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 10/04/2017
  9. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/04/2017

Leave a Reply