इज़ाफा – अजय कुमार मल्लाह

वो गुज़री तो कल थी खुश्बू अब भी है राहों में,
कि ख़्वाहिश है मेरी इतनी रहूँ उसकी पनाहों में,
क्या पता उसे पाकर मै थोड़ा सा सँभल जाऊँ,
इज़ाफा और ना हो फिर शायद मेरे गुनाहों में।

20 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/04/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/04/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/04/2017
  5. Kajalsoni 09/04/2017
  6. shrija kumari shrija kumari 09/04/2017
  7. C.M. Sharma babucm 10/04/2017
  8. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 10/04/2017
  9. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 10/04/2017
  10. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/04/2017

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