ग़ज़ल- नहीं दिख रहा जग में कोई बशर सा…मनिंदर सिंह “मनी”

नहीं दिख रहा जग में कोई बशर सा |
खत्म ही लगे अब नेकी का असर सा ||

खबर क्या किसी को डगर की बताओ |
पहेली लगे जिंदगी का सफर सा ||

रहे सोच मिलकर सभी क्या कमाया |
निशाँ दिख रहा दिल में बन कर कसर सा ||

दिखाओ न दर्पण किसी को कभी भी |
फरिश्ता बना बैठा है हर बशर सा ||

शिवाले कभी मस्जिदों को गिराकर |
रहे लोग कैसे कमाने कहर सा ||

मनिंदर सिंह “मनी”

24 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/04/2017
    • mani mani 09/04/2017
    • mani mani 09/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/04/2017
    • mani mani 09/04/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/04/2017
    • mani mani 09/04/2017
      • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/04/2017
        • mani MANINDER SINGH 09/04/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/04/2017
    • mani mani 09/04/2017
  5. Kajalsoni 09/04/2017
    • mani mani 09/04/2017
  6. md. juber husain md. juber husain 09/04/2017
    • mani mani 09/04/2017
  7. babucm babucm 10/04/2017
  8. mani mani 10/04/2017
    • babucm babucm 10/04/2017
      • babucm babucm 10/04/2017
        • mani mani 10/04/2017
      • mani mani 10/04/2017
  9. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/04/2017
    • mani mani 16/04/2017

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