जारी रखो – राकेश आर्यन

मिलने बिछड़ने का ये सफर जारी रखो।
थोड़ा करार हो और थोड़ी बेकरारी रखो।
तू मुझको अपना लगा
न जाने कैसी नज़र थी मेरी
अगर तेरी भी नज़र-ए-करम हो ऐसी
तो ये नज़र जारी रखो।
या भूलकर मेरे सारे लफ्ज़-ब-लफ्ज़
चलो फिर से अज़नबी बन जाये हमदोनों
इन यादों को ख़ुशनुमा मोड़ देकर
वक़्त की ये बे-इख़्तियारी रखो।
खबर मिली है के
वक़्त लगता है मरहम हर ज़ख्मों पर
ये ख़बर है काम की
ये ख़बर जारी रखो।

@aryan136207 (Twitter)

5 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/04/2017
  2. Rakesh Aryan 08/04/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 09/04/2017
  4. Kajalsoni 09/04/2017

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