मुक्तक….. काजल सोनी

नजरे मिला कर हमसे, तुम नजरे चुराते क्यों हो ।
धड़कन भी रुक जाये, ऐसे पलके झपकाते क्यों हो।
तन्हाई में जी रहे हो होकर तुम रुसवा ,
कोई गम हैं तो कह दो, गम अपना यू मुझसे छुपाते क्यों हो।

तुम्हे भूलने की कोशिश हैं, फिर वापस यादों में आते क्यों हो।
गैर हूँ मैं तेरे लिए , रोकर मुझे अपना बनाते क्यों हो ।
लाखों दर्द हैं जिंदगी में जिसे कह दो,
न कह कर जुबां से,अपने गम आँखों से यू बहाते क्यों हो ।

टूटे सपने बिखर जाने दो, उन्हें आँखों में सजाते क्यों हो।
रिश्ता मुझसे जोड़ कर, खुद टूट कर निभाते क्यों हो ।
सारे बंधन तोड़ कर आज खुल कर मुस्कुराओ,
झुठी मुस्कान होठों पर लाकर, खुद को यू बहलाते क्यों हो।

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” काजल सोनी ”

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/04/2017
    • Kajalsoni 10/04/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/04/2017
    • Kajalsoni 10/04/2017
  3. mani mani 08/04/2017
    • Kajalsoni 10/04/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 08/04/2017
    • Kajalsoni 10/04/2017
  5. C.M. Sharma babucm 08/04/2017
    • Kajalsoni 10/04/2017
    • Kajalsoni 10/04/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/04/2017
  7. Kajalsoni 10/04/2017

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