बचपन

बचपन कितना सुनहरा है ये बचपन
बचपन की यादो में खोया जहां
उसकी मिट्ठी यादो में सोया आसमान
खिल-खिलाती धूप में , दौड़ता भागता बचपन
लहराती ठंडी हवा में , मुस्कुराता बचपन
टिमटिमाती रातो में, रोशन होता बचपन
पानी की फुहारो को , गले लगाता बचपन
अपनी मस्ती में झूमता – गाता बचपन
हंसते खेलते ठहाको में, ठुमके लगाता बचपन
अपना – पराया ये ना जाने
यारो की यारी में रहता है ये बचपन
सीधा सादा भोला भाला, शीशे जैसे दिल का
बड़ा मासूम सा है ये बचपन
क्यू हो गये हम इतने बड़े कि
दुनिया की भीड़ में , खो गया कहीं ये बचपन
एक सवाल बार बार बचपन में उठता है
बड़े होकर क्या बनना है????
अब इस सवाल को याद करके
अब तो फिर बच्चा बनना है
याद आता है वो सुनहरा बचपन
ए जिंदगी बस थक गया हूँ तुझ से लड़ते – लड़ते
अब हिसाब कर दे तू मेरा
और वापिस लोटा दे वो मेरा बचपन

बरखा रानी

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 06/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/04/2017
  3. Kajalsoni 07/04/2017

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