कविता ::— एक था गॉव कवि ::—  अमन नैन

 

पुराना था जमाना

एक था गॉव हमारा

पनघट पर जाती थी

पानी लेने औरते इक्ट्ठी

बुढ्ढे बैठा करते थे

महफिल लाकर चबूतरे पर

किसान चलते थे खेतो मे

उठाकर हल कंधो पर

गीत गाते थे भवर खेतो मे

फूल खिलते सरसो के

मोह ले लेती थी मन

मधुर आवाज पंछियो की

सुनती थी किलकारी

बच्चो की गली गली

बनते थे खिलौने माटी के

खेलते सब मिलकर इक्ट्ठे

वह मौज बचपन की थी

अमन स्वर्ग से भी प्यारी

पुराना था जमाना

एक था गॉव हमारा

8 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/04/2017
    • Aman Nain Aman Nain 11/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 06/04/2017
    • Aman Nain Aman Nain 11/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/04/2017
    • Aman Nain Aman Nain 11/04/2017
  4. Kajalsoni 06/04/2017
    • Aman Nain Aman Nain 11/04/2017

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