अपने आप से लड़ो

जीवन कि गहराईयों को कोई नहीं समझ पाया है
खुद से लड़ने वाला ही इसका भेद जान पाया हैं
दूसरे को दोषी ठहराने से पहले
जिसने खुद को दोषी ठहराया हैं
उसने ही इस जिंदगी की उलझनो को सुलझाया हैं
विद्वान वो नहीं जो कुछ स्तर तक ही बड़ पाया हैं
विद्वान तो वो है जिसने समझ कि हर समझ को हराया हैं
जिसने मुश्किलों में डटना सिखा हैं
तजुरबो से ही आगे बढ़ना सिखा हैं
जिंदगी की कश्ती में उसका पैर नहीं डगमगाया हैं
उसने ही तुफ़ानो में कश्ती को पार लगाया हैं
बिना किसी का दिल दुखाये
जो अपना मतलब हल कर पाया है
दो मीठे बोलो से ही
वो हि खुद को साबित कर कुछ हासिल कर पाया हैं

बरखा रानी

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 06/04/2017
  2. Kajalsoni 06/04/2017

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