सुद्दीढ़ रथ — मधु तिवारी

पूछा विभीषण ने प्रभु राम से
कैसे समर करोगे
बिन रथ के रावण योद्धा से
क्या प्रभु जीत सकोगे ?

कहा प्रभु ने पास मे मेरे
भौतिक रथ तो नहीं है
जो रथ हाकूं मैं जग मे वह
सदा ही रहे सही है

शौर्य ,धैर्य दो रथ के पहिये
जो इस रथ को चलाए
सत्य शील दो ध्वजा निराले
सुदृढ़ रथ पर लहराये

बल विवेक संयम संग मे
परोपकार के घोड़े हैं
क्षमा ,दया समता की डोर से
बंधे ये सरपट दौड़े हैं

सारथी भजन ढाल वैराग्य
संतोष रूपी तलवार है
दान का फरसा बुद्धि की शक्ति
विग्यान धनुष का वार है

निर्मल स्थिर मन है तरकस
शम यम विविध बाण हैं
संतो गुरु जनों की पूजन
कवच बन करते त्राण हैं

ऐसे सौम्य सुसज्जित रथ पर
जो आरूढ हो जायेगा
निश्चित ही वह विजयी होगा
उसे कोई हरा न पायेगा

मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने
इसी रथ को चलाया था
आकर इस संसार मे सबको
सन्मार्ग दिखाया था

मधु तिवारी

आप सबको रामनवमी पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं ।

22 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/04/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 05/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/04/2017
  4. vinod sihag vinod sihag 05/04/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 05/04/2017
  5. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 05/04/2017
  6. Kajalsoni 05/04/2017
  7. sarvajit singh sarvajit singh 05/04/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 06/04/2017
  8. babucm babucm 06/04/2017
  9. mani mani 08/04/2017

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